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कैंसर को मारने के लिए बहुत ज्यादा ठंड का इस्तेमाल
कैंसर को मारने के लिए बहुत ज्यादा ठंड का इस्तेमाल
09-02-2023

क्रायोब्लेशन एक अनोखा तरीका है जिसमें असामान्य या बीमार टिशूज़ को जमा देने के लिए तरल नाइट्रोजन, तरल नाइट्रस ऑक्साइड या कम्प्रेस्ड आर्गन गैस का इस्तेमाल किया जाता है ताकि उन्हें खत्म किया जा सके। तापमान 346 से -320 डिग्री फेरनहीट के बीच कहीं भी हो सकता है। यह बहुत ही कम तापमान है। इस तापमान पर कोई भी चीज़ ठंडी होकर मर जाती है। सर्जरी के लिए क्रायोब्लेशन के उपयोग को क्रायोसर्जरी कहते हैं और इस तरीके से किए जाने वाले पूरे इलाज को क्रायोथेरेपी कहते हैं। कैंसर के ट्यूमर को खत्म करने के लिए क्रायोथेरेपी का इस्तेमाल रोगियों के बीच तेजी से कामयाब हो रहा है। यह दर्दरहित और कम समय लेने वाला इलाज है जो शरीर में कम से कम दखल देकर कैंसर को ठीक करता है। यह सिर्फ उसी हिस्से को निशाना बनाता है जहां कैंसर का ट्यूमर बढ़ रहा हो। एक इज़राइली कंपनी आईसक्यूर - इनोवेटिंग क्रायोथेरेपी सॉल्यूशन्स को ProSenseTM क्रायोब्लेशन टेक्नोलॉजी के लिए मान्यता मिली है। जिसमें ट्यूमर में तरल नाइट्रोजन की सूई लगाई जाती है जो उसे कुछ ही मिनटों में जमा देती है। वे दावा करते हैं कि यह सिर्फ ट्यूमर को खत्म करती है और आसपास के हिस्से और टिशूज़ को नुकसान नहीं पहुचाती। इस प्रकार के इलाज ने स्तन, फेफड़ों, गुर्दों और हड्डी में होने वाले कैंसर के घातक और सौम्य दोनो तरह के ट्यूमर पर अच्छा असर किया है। इसका इस्तेमाल रेटिनोब्लास्टोमा, त्वचा के कैंसर, आधार कोशिकाओं और स्क्वैमस कोशिकाओं सहित, एड्स से जुडे़ कापोसी सर्कोमा से हुए घावों, शुरूआती अवस्था में प्रोटेस्ट कैंसर, लिवर तक ही सीमित लिवर के कैंसर, हड्डी के कैंसर, ज्यादातर चोंड्रोसर्कोमा नॉन-स्माल सेल फेफडे़ का कैंसर, और साफ्ट टिश्यू ट्यूमर जैसे फाइब्रोमैटोसिस जैसे मामलों में किया जा सकता है। क्रायोथेरेपी के फायदेः          ·         यह शरीर में बहुत कम दखल देने वाला है इसीलिए रोगियों का इलाज बाहरी मरीजों की तरह किया जा सकता है ·         एक छोटा सा चीरा लगाया जाता है और केवल उसी जगह को सुन्न करने की जरूरत होती है। ·         खून बहना, दर्द होना और सर्जरी से जुड़ी और भी तकलीफें बहुत कम होती हैं। ·         आम तौर पर ट्यूमर के आस पास के स्वस्थ टिशूज़ को नुकसान नहीं पहुंचाता। ·         इसके दुष्प्रभाव बहुत कम हैं। ·         यह किफायती है। ·         जो लोग उम्र या दूसरे कारणों से सर्जरी नहीं करवा सकते उनके लिए यह एक विकल्प हो सकता है। ·         यह तब किया जा सकता है जब दूसरी तरह के इलाजों का मरीज पर असर न हो रहा हो। बड़ी खामियांः इसे केवल उन ट्यूमर्स या बढ़त में इस्तेमाल किया जा सकता है जो शरीर की सतह पर या इमेंजिंग जांच में देखे जा सकते हैं। यह तय किया जा पाना अभी भी बाकी है कि इस इलाज से मरीज की उम्र कितनी बढ़ाई जा सकती है। दुष्प्रभावः         रेडियेशन और कीमोथेरेपी जैसे इलाजों की तुलना में क्रायोथेरेपी के दुष्प्रभाव कम गंभीरता वाले हैं।     सर्वाइकल कोशिकाओं के इलाज में एंठन आ सकती है या खून बह सकता है।       शरीर के कुछ हिस्सों में जहां इलाज किया जा चुका हो, सूजन आ सकती है।      विरले मामलों में पित्त नली या धमनियों को नुकसान पहुंच सकता है या खून आ सकता है। हड्डियों के ट्यूमर हड्डियों को कमजोर बना सकते हैं।      दुष्प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि शरीर के किस हिस्से का इलाज किया गया और ट्यूमर की अवस्था क्या थी। बाद में जरूरी देखभालः ·         अगर शरीर के किसी बाहरी हिस्से का इलाज होना है तो केवल उस जगह को सुन्न किया जाएगा और आप एक ही दिन में घर जा सकते हैं। अगर किसी अंग के भीतरी हिस्से का इलाज किया जाना हो  तो मरीज को अस्पताल में भर्ती करना होता है। ·         जिस हिस्से का इलाज किया जाए उसके आस पास ठीक तरह से साफ सफाई रखनी होती है। ·         असामान्य बढ़त की अवस्था और स्थिति के हिसाब से डॉक्टर आपको बताते हैं कि किन बातों का ध्यान रखना है और किन बातों से परहेज करनी है। भारत में क्रायोब्लेशनः दुनिया भर में लोगों के बीच भारत इलाज के लिए एक पसंदीदा जगह बनता जा रहा है। किफायती और अच्छे इलाज से ही यह हो सका है। जीवन यापन की लागत लोगों की पहुंच में है। 19 वीं सदी में किसी समय खोजा गया क्रायोब्लेशन अब कैंसर के इलाज के तौर पर महत्वपूर्ण बन रहा है। यह इलाज भारत के बड़े शहरों में कई अस्पतालों में कराया जा सकता है। ये सभी अस्पताल चिकित्सा प्रक्रिया के ऊंचें मानदण्डो का पालन करते हैं। यह तथ्य कि फार्मास्यूटिकल में तरल नाइट्रोजन की मांग लगातार बढ़ रही है, भारत में क्रायोब्लेशन के इस्तेमाल और कामयाबी की तरफ इशारा करता है। क्रायोसर्जरी में सर्जरी की विफलता की दर बहुत कम है। यही कारण है कि इस इलाज का इस्तेमाल बढ़ रहा है। पर साथ ही, नए निवेशकों और उपकरणों के साथ अनुसंधान और विकास निरंतर जारी है। आने वाले समय में भारत में क्रायोब्लेशन की यात्रा बहुत लंबी है।

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