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इम्यूनोथेरेपी क्या है?
इम्यूनोथेरेपी क्या है?
09-02-2023

हमारे शरीर में एक प्रतिरक्षा प्रणाली है जो संक्रमण, वायरस या जो असामान्य कोशिकाएं बढ़ जाती हैं उनसे लड़ती है। इसके नियमित काम के हिस्से के तौर पर यह प्रतिरक्षा प्रणाली कैंसर की कोशिकाओं से लड़ती रहती है। कई बार अलग अलग कारणों से यह लड़ नहीं पाती और कैंसर कोशिकाएं एकसाथ आकर बढ़ने लगती हैं जिससे नुकसान पहुंचता है। दूसरी ओर कैंसर कोशिकाएं भी आनुवांशिक बदलाव करके, प्रोटीन और कोशिका की बनावट में बदलाव करके प्रतिरक्षा प्रणाली को चकमा दे सकती हैं। इम्यूनोथेरेपी इलाज का एक प्रकार है जौ कैंसर कोशिकाओं से लड़ने के लिए व्यक्ति में प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाता है। प्रतिरक्षा कोशिकाएं लसिका प्रणाली से पूरे शरीर में पहुंचती हैं। इस इलाज में व्यक्ति की प्रतिरक्षा प्रणाली को कुछ दवाओं और प्रोटीन की सहायता से बड़ी कुशलता के साथ अधिक गतिशील बनाया जाता है। इन्यूनोथेरेपी कई प्रकार की होती है इम्यून चेकप्वाईंट इनहिबिटरः दवाईयां जो प्रतिरक्षा प्रणाली को अधिक आक्रामक तरीके से कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने देती हैं। टी-सेल ट्रांसफर थेरेपीः आपके शरीर में से ट्यूमर के आसपास की सबसे सक्रिय टी कोशिकाओं को लेकर उन्हें प्रयोगशाला में कैंसर कोशिकाओं पर हमला करने के लिए बढ़ाया जाता है। इन्हें नसों के माध्यम से फिर से आपके शरीर में भेज दिया जाता है। मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज़ः ये प्रयोगशाला में तैयार किए गए खुद को कैंसर कोशिकाओं से जोड़ लेने के लिए बनाए गए प्रतिरक्षा प्रोटीन्स हैं। कुछ जो कैंसर कोशिकाओं को चिन्हित भी कर लेते हैं जिससे इलाज पूरा हो जाने के बाद भी प्रतिरक्षा प्रणाली उन्हें पहचान कर उनसे लड़ती रहे। इलाज के टीकेः ये उन टीकों से अलग होते हैं जो हम आम तौर पर लेते हैं। इनका काम कैंसर कोशिकाओं से लड़ने के लिए आपकी अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर बनाना है। इम्यून सिस्टम मॉड्यूलेटर्सः ये प्रतिरक्षा प्रणाली के कुछ विशेष हिस्सों को बेहतर बनाते हैं। इम्यूनोथेरेपी में कौनसी जांचें की जाती हैं बायोमार्कर्स वह जांच है जो असामान्यता का स्तर तय करती है। वे मरीज की अनुवांशिक बनावट, व्यवहार और प्रतिरक्षा प्रणाली के साथ उनके तालमेल की साफ तस्वीर दिखाती है। इम्यूनाथेरेपी में बायोमार्कर्स आसानी से मिल जाते हैं। कैंसर के इलाज में बायोमार्कर्स बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे इलाज की दशा दिशा तय करते हैं। इम्यूनोथेरेपी में तरल बायोप्सी भी की जा सकती है ताकि नतीजें जल्दी और आसानी से हासिल किए जा सकें। सामान्य बायोप्सी, इम्यूनोथेरेपी में ट्यूमर के लक्षणों के बजाय प्रतिरक्षा कोशिकाओं की स्थिति का आकलन करती है। जो इस इलाज की एक अलग खासियत है। इम्यूनोहिस्टोकैमेस्ट्री जांच का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर होता है क्योंकि वे कोशिकाओं के भीतर टिशू के सटीक संदर्भ में विशेष सेल्यूलर तत्वों के फैलाव और स्थान की जानकारी दे सकते हैं। जिसका उपयोग डॉक्टर बेहतर इलाज के लिए कर सकते हैं। इम्यूनोथेरेपी के लिए इसके विशेष मानदंड तय किए गए हैं। जिन मरीजों को इम्यूनोथेरेपी दी जा रही हो उनमें प्रतिक्रिया का अनुमान लगाना भी आसान है। इम्यूनोथेरेपी कैसे दी जाती है इम्यूनोथेरेपी को एक सूई के जरिए त्वचा के नीचे या मांसपेशी में नस में भेज दिया जाता है। कुछ दवाओं को सीधे जहां ट्यूमर होता है उस जगह पर सूई से भेज दिया जाता है। कुछ दवाएं खानी यानि निगलनी होती हैं। इम्यूनोथेरेपी में क्रीम का भी इस्तेमाल किया जाता है। खास तौर पर त्वचा के कैंसर में जहां तकलीफ हो वहां पर क्रीम लगाने की सलाह दी जाती है। एक अंतःशिरा (इंट्रावेसिकल) विधि से भी इलाज होता है जिसमें सीधे मूत्राशय में दवा दी जाती है। इम्यूनोथेरेपी के कोई दुष्प्रभाव इस तरह के इलाज से थकान, बुखार, सांस की तकलीफ, मिचली होना या उल्टी आना, दस्त लगना, सिर दुखना, भूख कम लगना, दाने होना या खुजली होने जैसे दुष्प्रभाव हो सकते हैं। इन सभी दुष्प्रभावों का इलाज कर इनसे निपटा जा सकता है। इनके कितने भी मामूली लक्षण हों डॉक्टर को बताना बहुत जरूरी है। कुल मिलाकर इम्यूनोथेरेपी एक असरदार और किफायती इलाज है।

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