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अपने इलाज को जानिए
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09-02-2023

इम्यूनोथेरेपी बनाम कीमोथेरेपी जैसे जैसे चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में तरक्की हो रही है इलाज का असर भी बेहतर हो रहा है। अलग अलग तरह के इलाज के बीच का फर्क जानना बहुत जरूरी है। इससे आप अपने डॉक्टर के साथ अच्छे से बात कर पाते हैं। साथ ही आपका या आपके प्रियजन का जो भी इलाज चल रहा होता है उसकी जानकारी होना आपकी चिंता और तनाव को कम करता है। कीमोथेरेपी क्या है? कीमोथेरेपी कैंसर कोशिकाओं को मारने और उन्हें सिकोड़ने के लिए दी जाती है ताकि ट्यूमर छोटा हो जाए और सर्जरी की जा सके। कई बार यह थेरेपी कैंसर कोशिकाओं के फैलाव को रोकने के लिए भी की जाती है ताकि कैंसर रोगी की जिन्दगी जितना भी हो सके बढ़ाई जा सके। कीमोथेरेपी में अलग अलग प्रकार की दवाईयां इंट्रावीनस या अंतःशिरा के माध्यम से दी जाती हैं। सूई से जुड़ी हुई एक नली को रोगी की छाती की नस में डालते हैं। कीमोथेरेपी की कुछ दवाएं गोलियों के रूप में भी ली जा सकती हैं। जबकि कुछ दवाओं को इंजेक्शन के जरिए मांसपेशियों में, त्वचा के नीचे या सीधे ही मेरूदंड के द्रव्य में लगा दिया जाता है। कीमोथेरेपी अगर ठीक से की जाए तो यह एक दर्दरहित प्रक्रिया है, इससे किसी प्रकार का दर्द नहीं होना चाहिए। अगर कभी ऐसा हो तो तुरंत डॉक्टर को बताना चाहिए। कभी कभार दवा आसपास के टिशूज़ में लीक हो जाती है जिससे दर्द हो सकता है। कैंसर के प्रकार और अवस्था के अनुसार कीमोथेरेपी में 5 मिनट से लेकर कुछ घंटों तक का समय लग सकता है। यह तय करने के लिए कि इलाज का आप पर कोई बुरा असर नहीं पड़ रहा है, इलाज के दौरान आपकी लगातार निगरानी की जाती है। कीमोथेरेपी के साईड इफैक्ट होते हैं लेकिन एक अच्छे डॉक्टर की मदद से उनसे अच्छी तरह निपटा जा सकता है, और मरीज को किसी तरह की तकलीफ नहीं होती। मिचली आना, दस्त लगना, थकान या बुखार महसूस होना कुछ सामान्य दुष्प्रभाव हैं जिनका इलाज आसानी से किया जा सकता है। अपने डॉक्टर के सम्पर्क में रहना बहुत जरूरी है। और अगर कोई भी तकलीफ बढ़ने लगे तो तुरंत डॉक्टर को बताना चाहिए। कीमोथेरेपी के दौरान बालों का झड़नाः कीमाथेरेपी करवाते समय सभी मरीजों के बाल नहीं झड़ते हैं। कीमोथेरेपी की दवाएं शरीर में बढ़ रही कैंसर कोशिकाओं को मार देती हैं। वे सामान्य और कैंसर की कोशिकाओं में फर्क नहीं कर पातीं इसीलिए अक्सर बालों के कोशों, मुहँ और जठरतंत्र पथ की कोशिकाएं भी मर जाती हैं जिससे कुछ मरीजों को मुहँ के छाले, मिचली आना, या दस्त आदि होते हैं और उनके बाल झड़ जाते हैं। इम्यूनोथेरेपी क्या है? यह एक और तरह का इलाज है जो व्यक्ति में कैंसर कोशिकाओं से लड़ने के लिए रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। कुछ दवाईयों, प्रोटीन्स और अन्य तत्वों की मदद से व्यक्ति की प्रतिरोध क्षमता को गतिशील किया जाता है। इस तरह का इलाज आसानी से तैयार किया जा सकता है और मरीज को दिया जा सकता है, इसलिए यह बडे़ पैमाने पर दिया जा सकता है। प्रतिरोधक कोशिकाएं लसिका प्रणाली से पूरे शरीर में पहुंचती हैं। और क्योंकि कैंसर कोशिकाओं की बनावट सामान्य कोशिकाओं की तरह नहीं होती है, इम्यूनोथेरेपी अधिकतर कैसंर कोशिकाओं को ही निशाना बनाती है। बायोमार्कर ऐसी जांच है जो असामान्यता की स्थिति तय करती है। यह रोगी की आनुवांशिक बनावट, व्यवहार और प्रतिरोधक क्षमता के साथ तालमेल की साफ तसवीर दिखाती हैं। इम्यूनोथेरेपी में बायोमार्कर आसानी से मिल जाते हैं। कैंसर के इलाज में बायोमार्कर बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इनसे ही इलाज का तरीका और समय तय होता है। इम्यूनोथेरेपी के लिए तरल बायोप्सी भी की जा सकती है ताकि नतीजे जल्दी और आसानी से पाए जा सकें। इन्यूनोथेरेपी के लिए सामान्य बायोप्सी ट्यूमर के लक्षणों की जगह प्रतिरोधक कोशिकाओं का आकलन करती है। जो इस इलाज की एक और खासियत है। IHC इम्यूनोहिस्टोकैमेस्ट्री का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है क्योंकि वे कोशिकाओं में टिशू के सटीक संदर्भ में विशेष सेल्यूलर तत्वों के फैलाव और स्थान के संकेत दे सकते हैं। जिसे डॉक्टर बेहतर इलाज के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। इम्यूनोथेरेपी के लिए इसके विशेष मानदंड बनाए गए हैं। जिन मरीजों को इम्यूनोथेरेपी दी जा रही हो उनमें प्रतिक्रियाओं का अनुमान लगा पाना भी आसान है। इम्यूनोथेरेपी त्वचा के नीचे या मांसेपेशी में एक नस में इंजेक्शन के जरिए या फिर सीधे शरीर में जिस जगह ट्यूमर है वहां सूई लगाकर दी जाती है। इस इलाज के भी कुछ दुष्प्रभाव हो सकते हैं जैसे थकान, बुखार, सांस की तकलीफ, मिचली होना या उल्टी आना, दस्त लगना, सिर दुखना, दाने या खुजली होना। कुल मिलाकर इम्यूनोथेरेपी किफायती इलाज है। कैंसर के कई डॉक्टर कीमोथेरेपी और इम्यूनोथेरेपी के मिलेजुले इलाज को बेहतर मानते हैं। इम्यूनोथेरेपी असर को बढ़ाने और इसके दुष्प्रभावों को कम करने के लिए कई तरह के क्लीनिकल परीक्षण किए जा रहे हैं। कैरियर कैंसर अस्पताल, भोपाल, मध्य प्रदेश के कैंसर विशेषज्ञ आपके मामले, लक्षणों और कैंसर की अवस्था के मुताबिक तय करते हैं कि कौनसा इलाज किया जाए। किसी मरीज के लिए कौनसा इलाज सबसे अच्छा रहेगा यह तय करने के लिए डॉक्टर बायोकेमिकल मार्कर्स का इस्तेमाल करते हैं। बायोकेमिकल मार्कर्स जैसे हॉर्मोन्स, एंजाइम्स, प्रोटीन्स, एंटीजेन्स और एंटीबॉडी, जब कैंसर कोशिकाओं के सिकुड़ने पर बनते हैं या उनमें बदलाव आता है तो उनका सावधानी से अध्ययन किया जाता है। कैंसर से लड़ाई की इस यात्रा को आसान और सफल बनाने के लिए विशेषज्ञ और समर्पित डॉक्टरों और कर्मचारियों की एक टीम यहां मौजूद है।

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