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स्तन कैंसर का शीघ्र पता लगाना
स्तन कैंसर का शीघ्र पता लगाना
13-02-2023

इस साल में अब तक स्तन कैंसर के इतने ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं कि यह अपने आप में एक खतरे की घंटी हैं और इसने चिकित्सा बिरादरी को गहरी चिंता में डाल दिया है। इन मामलों की संख्या को कम करने का सबसे असरदार तरीका यही होगा कि अधिक जोखिम वाले रोगियों की पहचान करके उन्हें बकायदा और नियमित जांच करवाने में मदद की जाए। कैरियर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साईंसेज़ में लगातार रोगियों की जांच की जा रही है लेकिन उनकी संख्या बढ़ाने की जरूरत है। कैरियर अस्पताल में बीमारी की पहचान करने वाल उपकरणों जैसे रेडियोलॉजी और इमेजिंग का पूरा इंतजाम है। अस्पताल ज्यादा जोखिम वाले मरीजों का अच्छी तरह से पता लगा रहा है और जागरूकता अभियान भी चला रहा है जिससे लक्षण दिखाई देने पर ज्यादा से ज्यादा लोग बीमारी को गंभीरता से लेकर रिपोर्ट कर सकें। सबसे अच्छी कवायद जो की जानी चाहिए वह यह होगी कि 15 वर्ष से अधिक उम्र की सभी महिलाएं अपने डॉक्टर से सम्पर्क करें और नियमित जांच की जरूरत के बारे में उनसे चर्चा करें। स्तन कैंसर की पहचान के लिए स्क्रीनिंग कर लेने से ही स्तन कैंसर होने से नहीं रोका जा सकता लेकिन शुरूआत में ही, समय रहते इस का पता लगाया जा सकता है। भारत में आम तौर पर हम यह देखते हैं कि ज्यादातर मामलों में जब तक इलाज शुरू होता है वे चौथी या पांचवीं स्टेज तक पहुंच चुके होते हैं और ऐसे में मास्टेक्टॉमी, यानि कि कैंसर से प्रभावित स्तन को पूरी तरह से हटा देने के अलावा कोई चारा नहीं बचता है। ऐसा करने से रोगी पर शारीरिक और मानसिक दोनो तरह से असर पड़ता है। हांलाकि स्तन फिर से बनाने और उसे सही आकार देने के विकल्प मौजूद हैं लेकिन वे काफी महंगे हैं और व्यापक तौर पर उपलब्ध नहीं हैं। कैंसर का इलाज जल्दी शुरू कर के रोगी को कैंसर से हाने वाली तकलीफ को बहुत कम किया जा सकता है। और इससे कैंसर के कारण होने वाली मौतों की संख्या भी कम की जा सकती है। स्तन कैंसर के शुरूआती लक्षणों को पहचानना मुश्किल होता है। वैसे भी भारतीय महिलाएं शरीर में ऐसे किसी भी बदलाव या लक्षण के बारे में परिवार के सदस्यों या डॉक्टर से बात करने में हिचकिचाती हैं। हम उम्मीद करते हैं कि जागरूकता अभियानों और जानकारी बढ़ाने वाले कार्यक्रमों से यह उनका रवैया बदलेगा और वे समय रहते अपनी बात कह सकेंगी। ज्यादातर लोगों को स्तन कैंसर के लक्षणों के बारे में पता नहीं होता है। बाहं के नीचे और स्तन में किसी भी तरह की गांठ महसूस हो तो डॉक्टर को दिखाना चाहिए। स्तन के किसी भी हिस्से में सूजन, स्तन पर गड्ढा या कोई निशान, निप्पल के आसपास दर्द, आकार में बदलाव, लाल पड़ना या सूजन आना, वगैरह भी कैसंर की तरफ इशारा कर रहे हो सकते हैं। कई बार ये लक्षण सेहत से जुड़े किसी और कारण से होते हैं। इसीलिए कैंसर की किसी संभावना को खारिज करने के लिए नियमित रूप से जांच करवाते रहना जरूरी है। कैंसर की शुरूआत में ही पहचान इससे निजात पाने कि दिशा में सही कदम है।

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